बस इतनी सी मिल्कियत - कविता
बस इतनी सी मिल्कियत अपनी ही जज़्बातों से खुद ही फ़रेब खा रही ... अपनी ही …
बस इतनी सी मिल्कियत अपनी ही जज़्बातों से खुद ही फ़रेब खा रही ... अपनी ही उम्मीदों की राख लपेटे जसद शमशान सा लग रहा... पलकों की भींगी को…
Read moreविष्णु और ब्रह्मा कौन पूजनीय एक समय की बात है क्षीरसागर में श्याम वर्ण के बड़े-बड़े पत्थरों से बने मंदिर रूपी महल में जिसमें सर्वत्र जल…
Read moreकिताब कैसे पढ़े? सवाल कितना आसान है जवाब आसान है क्या.... जो भी हो किताब थोड़ी-थोड़ी ही पढ़ा करें। मयखाने में रखी शराब थोड़ी-थोड़ी …
Read moreनफस की बात पहली बार अपने आप पे रोना आया.. ऐसे ना थे हम इस बात पे रोना आया... सही व गलत से परे मेरा इश्क़ फिर क्यों इस सहब पे रोना …
Read moreपसंदीदा कोना हर किसी के घर व जीवन में एक पसंदीदा कोना होता है जहाँ बैठकर सुकून के पल गुजरा करते हैं चाय और कॉफी के प्याले होते हैं पसंद …
Read moreयाद आती है याद आती है बहोत आती है जब आती है तो जाती नहीं जाती नहीं तो मिलने का दिल करता है मिलने का कोई Option नहीं.... कोई …
Read moreउदास इश्क़ 5 कभी कभी उदास इश्क़ कि हर शाम उदास होती है कभी लफ़्ज उदास है तो कभी मौसम उदास होता है घर का हर साजों सामान अपनी उदासी की द…
Read moreखिड़की से चांद (poem) जब तक मुस्कुराता है खिड़की से चांद हमें नींद नहीं आती भले हो रात के दूसरे पहर हाथों में हो चाय के प्याले गोद मे…
Read moreख्याल-ए-दिल (poem) दिल को बहलाने के लिये ख्याल बड़े अच्छे-अच्छे आते हैं हमें दिल डूब भी जाता है ख्यालों के डगर में बड़े ग…
Read moreबस इतनी सी मिल्कियत अपनी ही जज़्बातों से खुद ही फ़रेब खा रही ... अपनी ही …