मन (कविता)
मन (कविता) मन को तरह - तरह से समझाया कभी फुसलाया कभी बहलाया बात नहीं बनी …
मन (कविता) मन को तरह - तरह से समझाया कभी फुसलाया कभी बहलाया बात नहीं बनी तो कभी डांटा कभी फटकारा सौ - सौ उलहाने दिये खुद को सौ - सौ जतन …
Read moreभले ही ना आओ उम्र भर भले ही ना आओ उम्र भर पर कह के जाना आऊंगा .... भले ही ना मिलो फिर कभी पर कह के जाना फिर मिलेंगे..…
Read moreमुक्तक् 1. जो कहीं हो तो ढुंढ लूँ उसे जो हर जगह है उसका कैसे पता करूँ 2. खुद को ढुँढु अपना पता खोजूँ सब खो के ही ख…
Read moreतुम्हारी यादें तुम्हारी यादें धूप का एक टुकड़ा ओस की बुंदे पतझड़ का फूल तन्हाइयों की बातें और शाम की रोशनाई लफ्ज़ बुद-बुदाये तेरा शुक्र…
Read moreकेतु (कविता) जो दिल से उतर जाते वो माथे पे नहीं सजते हैं । जो नजर से गिर जाते वो माथे का गुरूर नहीं बनते हैं ।। वो खुश हैं इस भ्रम में …
Read moreशनि महादशा शनि दशा आती है तो सब जीरो हो जाता है जीरो से उपर आने में वक्त लगता है फिर मिले ना मिले अभिलाषा खत्म हो जाती है जीवन की श…
Read moreफरेब (कविता /Poetry) झूठे लोग तस्वीर बड़ी अच्छी बनाते हैं अपनी... रावण के तो दस सिर थे ये तो सौ-पचास मुखौटे लिया घूमते हैं ... इनके…
Read moreसच पे सिलवट / कविता किसी ने कहा मुझसे झूठ बोलने में माहिर हूं मैने खुद से कहा सच खोजने में माहिर हूं झूठ बोलने वाले का ख्याल है झूठ से दुनियां …
Read moreमन (कविता) मन को तरह - तरह से समझाया कभी फुसलाया कभी बहलाया बात नहीं बनी …