मु्ददतों के बाद (कविता)
मु्ददतों के बाद बड़ी मु्ददतों के बाद तुम्हें पाया है डर है कि तुम फिर चले …
मु्ददतों के बाद बड़ी मु्ददतों के बाद तुम्हें पाया है डर है कि तुम फिर चले ना जाओ... करोड़ो सीपियों के बीच तुम्हें ढुंढा है डर है कि तुम क…
Read moreकोई इंतजार करता चला जाता है तारीखें बदलती रहती है दिन गुजरता रहता है थमा - थमा सा वक़्त भी चला ही जाता है पर कोई बिछोह के उस लम्हें में …
Read moreजब तु याद आये जब तू याद आये इस कदर कि गीली लकड़ी सी सुलगूँ और अपने ही बेजार दिल को थामूँ जब तु याद आये इस कदर कि आसमां की चांदनी भी मा…
Read moreमुस्कुराती हूँ मुस्कुराती हूँ दुख हो या सुख हो याद में या इंतज़ार में मिलन हो या बिछोह में दर्द में या रुदन में ऊँच में या नीच में मान में या अपमान म…
Read moreमन (कविता) मन को तरह - तरह से समझाया कभी फुसलाया कभी बहलाया बात नहीं बनी तो कभी डांटा कभी फटकारा सौ - सौ उलहाने दिये खुद को सौ - सौ जतन …
Read moreभले ही ना आओ उम्र भर भले ही ना आओ उम्र भर पर कह के जाना आऊंगा .... भले ही ना मिलो फिर कभी पर कह के जाना फिर मिलेंगे..…
Read moreमुक्तक् 1. जो कहीं हो तो ढुंढ लूँ उसे जो हर जगह है उसका कैसे पता करूँ 2. खुद को ढुँढु अपना पता खोजूँ सब खो के ही ख…
Read moreतुम्हारी यादें तुम्हारी यादें धूप का एक टुकड़ा ओस की बुंदे पतझड़ का फूल तन्हाइयों की बातें और शाम की रोशनाई लफ्ज़ बुद-बुदाये तेरा शुक्र…
Read moreकेतु (कविता) जो दिल से उतर जाते वो माथे पे नहीं सजते हैं । जो नजर से गिर जाते वो माथे का गुरूर नहीं बनते हैं ।। वो खुश हैं इस भ्रम में …
Read moreशनि महादशा शनि दशा आती है तो सब जीरो हो जाता है जीरो से उपर आने में वक्त लगता है फिर मिले ना मिले अभिलाषा खत्म हो जाती है जीवन की श…
Read moreफरेब (कविता /Poetry) झूठे लोग तस्वीर बड़ी अच्छी बनाते हैं अपनी... रावण के तो दस सिर थे ये तो सौ-पचास मुखौटे लिया घूमते हैं ... इनके…
Read moreसच पे सिलवट / कविता किसी ने कहा मुझसे झूठ बोलने में माहिर हूं मैने खुद से कहा सच खोजने में माहिर हूं झूठ बोलने वाले का ख्याल है झूठ से दुनियां …
Read moreमु्ददतों के बाद बड़ी मु्ददतों के बाद तुम्हें पाया है डर है कि तुम फिर चले …