जब तु याद आये
इस कदर कि
गीली लकड़ी सी सुलगूँ
और अपने ही
बेजार दिल को थामूँ
जब तु याद आये
इस कदर कि
आसमां की चांदनी भी
मांगे मुझसे कुछ बुंदे उधार
मोतियों सी बरसे वो
ओस की बुंदे बन फूलों पे ....
जब तु याद आये
इस कदर कि
सप्तऋषि के तारों संग
आसमां में कैद हो जाऊं
फिर मैं देखूँ तुझे
पूर्णिमा की रोशनी से
जब तु याद आये
बहुत....
~ रश्मि
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