खिड़की से चांद (poem)
खिड़की से चांद (poem) जब तक मुस्कुराता है खिड़की से चांद हमें नींद नहीं …
खिड़की से चांद (poem) जब तक मुस्कुराता है खिड़की से चांद हमें नींद नहीं आती भले हो रात के दूसरे पहर हाथों में हो चाय के प्याले गोद मे…
Read moreख्याल-ए-दिल (poem) दिल को बहलाने के लिये ख्याल बड़े अच्छे-अच्छे आते हैं हमें दिल डूब भी जाता है ख्यालों के डगर में बड़े ग…
Read moreमुद्दत हुई तुम नहीं आओगे इल्म था हमें मुद्दतें पहले ही तुम्हारी बे-आराम देह बहुत कुछ बयाँ कर गई थी पर दिल है कि तस्लीम नहीं करता वो क़वान…
Read moreमुस्कुराती हूँ मुस्कुराती हूँ दुख हो या सुख हो याद में या इंतज़ार में मिलन हो या बिछोह में दर्द में या रुदन में ऊँच में या नीच में मान में या अपमान म…
Read moreखिड़की से चांद (poem) जब तक मुस्कुराता है खिड़की से चांद हमें नींद नहीं …