दिलों दिमाग पे छाये इस कदर कि इंतजार में वक़्त थम सा गया है। तुम्हारा आना अब बस दुआओं की बात है कि अब मरना भी दुश्वार हो सा गया…
भूल सकना (poem) भूल सकना मुमकिन होता तो तुम्हें जरूर भुला देते। रोज आग म…