मु्ददतों के बाद (कविता)
मु्ददतों के बाद बड़ी मु्ददतों के बाद तुम्हें पाया है डर है कि तुम फिर चले …
क्या आपने भी बचपन में पारले जी और चीनी वाला बिस्कुट खाया है, निःसंदेह खाया ही होगा। बचपन की कुछ यादें होती हैं जो हमें कभी भूल नहीं देती …
Read moreआज मदर्स डे है। ये मदर्स डे, फादर डे या ब्रदर डे इत्यादि मुझे ज्यादा समझ नहीं आते ये सब तो पश्चिमी सभ्यता की बातें हैं। हम भारतीयों के ल…
Read moreआज मन उदास है, क्यों पता नहीं.... बेवजह यूँ ही... जींदगी मे सबकुछ बेवजह तो नहीं होता। हर बात हर लफ्ज हर चुनाव हर फैसला बिना वजह तो नहीं होता। फिर ये …
Read moreपिछले कुछ दिनों से बारिश हो रही है, पर रूह को खुशी नहीं मिल रही है। बारिश भी उदास सी लग रही है। शायद वो भी गमजदा है,लगता है उसे भी आने वाले तुफान का …
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