भूल सकना (Poem)
भूल सकना (poem) भूल सकना मुमकिन होता तो तुम्हें जरूर भुला देते। रोज आग म…
मन (कविता) मन को तरह - तरह से समझाया कभी फुसलाया कभी बहलाया बात नहीं बनी तो कभी डांटा कभी फटकारा सौ - सौ उलहाने दिये खुद को सौ - सौ जतन …
Read moreभले ही ना आओ उम्र भर भले ही ना आओ उम्र भर पर कह के जाना आऊंगा .... भले ही ना मिलो फिर कभी पर कह के जाना फिर मिलेंगे..…
Read moreमुक्तक् 1. जो कहीं हो तो ढुंढ लूँ उसे जो हर जगह है उसका कैसे पता करूँ 2. खुद को ढुँढु अपना पता खोजूँ सब खो के ही ख…
Read moreभूल सकना (poem) भूल सकना मुमकिन होता तो तुम्हें जरूर भुला देते। रोज आग म…