भूल सकना (Poem)
भूल सकना (poem) भूल सकना मुमकिन होता तो तुम्हें जरूर भुला देते। रोज आग म…
Muktak *दर्द में दुख में उदासी में तन्हाई में जब तक हम रोते हैं तब तक-सब ठीक है जिस दिन आँसू सुख जाये तब-सब ठीक नहीं होता। * पास…
Read moreमुक्तक् 1. जो कहीं हो तो ढुंढ लूँ उसे जो हर जगह है उसका कैसे पता करूँ 2. खुद को ढुँढु अपना पता खोजूँ सब खो के ही ख…
Read moreभूल सकना (poem) भूल सकना मुमकिन होता तो तुम्हें जरूर भुला देते। रोज आग म…