मुद्दत हुई (poem)
मुद्दत हुई तुम नहीं आओगे इल्म था हमें मुद्दतें पहले ही तुम्हारी बे-आराम दे…
Muktak *दर्द में दुख में उदासी में तन्हाई में जब तक हम रोते हैं तब तक-सब ठीक है जिस दिन आँसू सुख जाये तब-सब ठीक नहीं होता। * पास…
Read moreमुक्तक् 1. जो कहीं हो तो ढुंढ लूँ उसे जो हर जगह है उसका कैसे पता करूँ 2. खुद को ढुँढु अपना पता खोजूँ सब खो के ही ख…
Read moreमुद्दत हुई तुम नहीं आओगे इल्म था हमें मुद्दतें पहले ही तुम्हारी बे-आराम दे…