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मुक्तक् - 2

     Muktak




*दर्द में
दुख में
उदासी में
तन्हाई में
जब तक हम रोते हैं
तब तक-सब ठीक है
जिस दिन आँसू सुख जाये
तब-सब ठीक नहीं होता। 

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