Ticker

6/recent/ticker-posts

मुक्तक् - 2

     Muktak






*दर्द में
दुख में
उदासी में
तन्हाई में
जब तक हम रोते हैं
तब तक-सब ठीक है
जिस दिन आँसू सुख जाये
तब-सब ठीक नहीं होता। 

*    पास बुलाओगे
तो बहुत पास चले आयेंगें
      दूर करोगे
तो बहुत दूर चले जायेंगे
कठपुतली सा नसीब 
जिधर डोर खींची जायेगी
उधर ही खुद को पायेंगें‌ .... 

*  जीवन क्षणभंगुर
    इसलिए जीने की
   थोड़ी कोशिश की
   वो भी क्षणभंगुर.... 

*कभी ना ख़तम होने वाले इंतजार की आदत है । 
बस खुद को एक बार फिर से मनाने की बात है।। 

Post a Comment

0 Comments