Muktak
*दर्द में
दुख में
उदासी में
तन्हाई में
जब तक हम रोते हैं
तब तक-सब ठीक है
जिस दिन आँसू सुख जाये
तब-सब ठीक नहीं होता।
* पास बुलाओगे
तो बहुत पास चले आयेंगें
दूर करोगे
तो बहुत दूर चले जायेंगे
कठपुतली सा नसीब
जिधर डोर खींची जायेगी
उधर ही खुद को पायेंगें ....
* जीवन क्षणभंगुर
इसलिए जीने की
थोड़ी कोशिश की
वो भी क्षणभंगुर....
*कभी ना ख़तम होने वाले इंतजार की आदत है ।
बस खुद को एक बार फिर से मनाने की बात है।।
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