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इश्क़ में ‌(poem)

इश्क़ में


1. हम उन्हें देख सकते हैं। 
    इबादत की इजाजत नहीं है।। 

   हम उन्हें महसूस कर सकते हैं। 
   होने की इजाजत नहीं है।। 

   हम उनसे मोहब्बत कर सकते हैं। 
   इज़हार की इजाज़त नहीं है।। 

2. कुछ मोहब्बत अकेले ही की जाती है।   
    किसी और से उम्मीद तन्हा ही करती है।। 

3. कोई क्या समझेगा 
    हर मुस्कान से
    पहले और बाद
    कोई दर्द में जी के आया है।  

4.  पता नहीं क्या है तुममें
     दिल से जाते नहीं, 
     खुदा थोड़ा भी मेहरबान
     क्यूँ नहीं होता, 
     कुछ पल के लिये ही सही
     भुला दे तुम्हें। 

 5.  हम रोज टूटते हैं
      रोज खुद को समझाते हैं
      रोज बिखर जाते हैं.... 
      हम रोज जीते हैं
      हँस कर रोज मरते हैं  
      क्योंकि हम इश्क़ में हैं... 
 





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