भूल सकना (Poem)
भूल सकना (poem) भूल सकना मुमकिन होता तो तुम्हें जरूर भुला देते। रोज आग म…
मु्ददतों के बाद बड़ी मु्ददतों के बाद तुम्हें पाया है डर है कि तुम फिर चले ना जाओ... करोड़ो सीपियों के बीच तुम्हें ढुंढा है डर है कि तुम क…
Read moreकोई इंतजार करता चला जाता है तारीखें बदलती रहती है दिन गुजरता रहता है थमा - थमा सा वक़्त भी चला ही जाता है पर कोई बिछोह के उस लम्हें में …
Read moreजब तु याद आये जब तू याद आये इस कदर कि गीली लकड़ी सी सुलगूँ और अपने ही बेजार दिल को थामूँ जब तु याद आये इस कदर कि आसमां की चांदनी भी मा…
Read moreमन (कविता) मन को तरह - तरह से समझाया कभी फुसलाया कभी बहलाया बात नहीं बनी तो कभी डांटा कभी फटकारा सौ - सौ उलहाने दिये खुद को सौ - सौ जतन …
Read moreमुक्तक् 1. जो कहीं हो तो ढुंढ लूँ उसे जो हर जगह है उसका कैसे पता करूँ 2. खुद को ढुँढु अपना पता खोजूँ सब खो के ही ख…
Read moreकेतु (कविता) जो दिल से उतर जाते वो माथे पे नहीं सजते हैं । जो नजर से गिर जाते वो माथे का गुरूर नहीं बनते हैं ।। वो खुश हैं इस भ्रम में …
Read moreशनि महादशा शनि दशा आती है तो सब जीरो हो जाता है जीरो से उपर आने में वक्त लगता है फिर मिले ना मिले अभिलाषा खत्म हो जाती है जीवन की श…
Read moreफरेब (कविता /Poetry) झूठे लोग तस्वीर बड़ी अच्छी बनाते हैं अपनी... रावण के तो दस सिर थे ये तो सौ-पचास मुखौटे लिया घूमते हैं ... इनके…
Read moreबाकी मैं सर्वत्र हूं (छोटी कविता ) जहां झूठ है वहां मैं नहीं जहां छल है वहां मैं नहीं जहां दुराव छिपाव है वहां मैं नहीं चाहे शत्र…
Read moreसारे चेहरे (कविता) झूठ बोलते हैं बड़ी शिद्दत से यूं जैसे हम किसी और ग्रह के निवासी हैं हंसी आती है उनकी मूढ़ता पे, वो क्या जाने हमें…
Read moreफितरत (कविता) जिन्होंने हमें दुश्मनों की तरह समझ अपने वजूद का पताका फहराया। आज हमारे कदमों में झुके पड़े हैं …
Read moreप्रारब्ध लौट कर आता है (हिंदी कविता) कब और कैसे जाने क्यों कुछ सच्चे लोग छोड़ कर चले जाते हैं मुकद्दर को भी मंजूर ना हो वो बात मूक अल…
Read moreराम ऐसे आयेंगे ! (कविता) किसी उत्सव के पीछे कोई स्याह पक्ष होता है यह कोई नहीं देखता हजारों की मौत पर खड़ा है धर्म का बाजार यह कोई न…
Read moreकहानी वो नहीं (कविता) कहानी वो नहीं होती जो हमेशा कही जाती है कभी सोचा है तुमने कहानी वो नहीं होती जो दिखती है कहानी वो भी नहीं होती जो …
Read more1. दौलत कुछ नए की तलाश में जो है वो भी खो देते हैं आज घमंड है तुम्हें अपनी दौलत का कल ऐसा भी होगा चंद सिक्के भी ढूंढोगे आलमारी में......…
Read moreकठपुतली ( हिंदी कविता) ऐसा भी क्या है तेरे बिना रह ना पाऊं ऐसा भी क्या है तुझे देखे - तुझे सुने बिना जी ना पाऊं मन मेरा डोर तेरे हाथ म…
Read moreउसकी मुस्कान (कविता) कभी कभी कुछ भी उकेर देती हूँ कभी रंगों से कभी स्याही से... कभी कोई नज्म तो कभी कोई किस्सा कभी बेवजह की बातें होती ह…
Read moreरिश्तों का हेर- फेर ( कविता ) रिश्तों में चढ़ा देते हैं जो झूठ की जिल्द और कहते हैं हमारे जैसा कोई पाक-साफ ना मिलेगा... बुनियाद ही फरेब प…
Read moreभूल सकना (poem) भूल सकना मुमकिन होता तो तुम्हें जरूर भुला देते। रोज आग म…