केतु ( कविता)
केतु (कविता) जो दिल से उतर जाते वो माथे पे नहीं सजते हैं । जो नजर से गिर …
केतु (कविता) जो दिल से उतर जाते वो माथे पे नहीं सजते हैं । जो नजर से गिर जाते वो माथे का गुरूर नहीं बनते हैं ।। वो खुश हैं इस भ्रम में …
Read moreशनि महादशा शनि दशा आती है तो सब जीरो हो जाता है जीरो से उपर आने में वक्त लगता है फिर मिले ना मिले अभिलाषा खत्म हो जाती है जीवन की श…
Read moreफरेब (कविता /Poetry) झूठे लोग तस्वीर बड़ी अच्छी बनाते हैं अपनी... रावण के तो दस सिर थे ये तो सौ-पचास मुखौटे लिया घूमते हैं ... इनके…
Read moreसच पे सिलवट / कविता किसी ने कहा मुझसे झूठ बोलने में माहिर हूं मैने खुद से कहा सच खोजने में माहिर हूं झूठ बोलने वाले का ख्याल है झूठ से दुनियां …
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