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फरेब (कविता /Poetry)

फरेब (कविता /Poetry) 



झूठे लोग 
तस्वीर बड़ी अच्छी बनाते हैं 
अपनी...

रावण के तो दस सिर थे 
ये तो सौ-पचास मुखौटे 
लिया घूमते हैं ... 

इनके फरेब तले 
हर अक्स ही इनका 
झूठ का पुलिंदा होता है...

जाने कैसी फितरत है 
परवरिश है
 या 
शख्सियत ही ऐसी है ....

अब तो दिल घबड़ाता है 
कैसे गुजार लिये 
इतने साल...

अब ना कोई 
किनारा है 
अब दिल 
हर ओर से 
बेगाना है ...

मन में उठती 
समुंदर की
लहरें बड़ी 
तेज है 
डूबना चाहूं 
तो भी डूब नहीं सकते 
कुछ जंजीरों का
फसाना है ....


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