भूल सकना (Poem)
भूल सकना (poem) भूल सकना मुमकिन होता तो तुम्हें जरूर भुला देते। रोज आग म…
मुस्कुराती हूँ मुस्कुराती हूँ दुख हो या सुख हो याद में या इंतज़ार में मिलन हो या बिछोह में दर्द में या रुदन में ऊँच में या नीच में मान में या अपमान म…
Read moreमन (कविता) मन को तरह - तरह से समझाया कभी फुसलाया कभी बहलाया बात नहीं बनी तो कभी डांटा कभी फटकारा सौ - सौ उलहाने दिये खुद को सौ - सौ जतन …
Read moreभले ही ना आओ उम्र भर भले ही ना आओ उम्र भर पर कह के जाना आऊंगा .... भले ही ना मिलो फिर कभी पर कह के जाना फिर मिलेंगे..…
Read moreमुक्तक् 1. जो कहीं हो तो ढुंढ लूँ उसे जो हर जगह है उसका कैसे पता करूँ 2. खुद को ढुँढु अपना पता खोजूँ सब खो के ही ख…
Read moreतुम्हारी यादें तुम्हारी यादें धूप का एक टुकड़ा ओस की बुंदे पतझड़ का फूल तन्हाइयों की बातें और शाम की रोशनाई लफ्ज़ बुद-बुदाये तेरा शुक्र…
Read moreभूल सकना (poem) भूल सकना मुमकिन होता तो तुम्हें जरूर भुला देते। रोज आग म…