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तुम कौन हो (poem)

तुम कौन हो



 जो तुम हो

वो दिखाते नहीं

खुद को खुद से

छिपाते हो तुम

एक झीनी सी रेखा है, 

असल में

तुम्हारे होने व ना होने के बीच

तुम जो हो

खुद को भी बतलाते नहीं... 

सब बातों से परे होकर

 " मैं कौन हूँ "

सवाल खुद से पूछते भी नहीं

जीवन की बनी बनाई

परम्परा से अलग

"तुम कौन हो"

यह अवस्था

ढूंढते क्यों नहीं..... 


Rashmi~

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