तुम कौन हो
वो दिखाते नहीं
खुद को खुद से
छिपाते हो तुम
एक झीनी सी रेखा है,
असल में 'जो तुम हो'
तुम्हारे होने व ना होने के बीच
खुद को भी बतलाते नहीं...
सब बातों से परे होकर
" मैं कौन हूँ "
सवाल खुद से पूछते भी नहीं
जीवन की बनी बनाई
परम्परा से अलग
"तुम कौन हो"
यह अवस्था
ढूंढते क्यों नहीं.....
Rashmi~
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