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मुस्कुराती हूँ (कविता)

मुस्कुराती हूँ






मुस्कुराती हूँ
दुख हो या सुख हो
याद में या इंतज़ार में
मिलन हो या बिछोह में
दर्द में या रुदन में
ऊँच में या नीच में
मान में या अपमान में
कोई गिराये या कोई उठाये
मुस्कुराती हूँ
शिव में या शक्ति में
कृष्ण में या भक्ति में
जब जिस क्षण 
जहाँ मैं - मैं ना रहूँ
खुद के होने का अहसास ना हो
मुस्कुराती हूँ
क्योंकि कोई है 
जो मेरी मुस्कुराहट से
मुस्कुराता है.... 


~ रश्मि




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