मन (कविता)
तरह - तरह
से समझाया
कभी फुसलाया
कभी बहलाया
बात नहीं बनी तो
कभी डांटा
कभी फटकारा
सौ - सौ उलहाने
दिये खुद को
सौ - सौ जतन
किये खुद पे
समझदारी की सीख
वक़्त की नजाकत दी
पर मन है
कि मानता ही नहीं...
~रश्मि
गहरी नींद गहरी नींद तुम्हारा स्वप्न.. कहानी कही अनकही सी..…
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