मन (कविता)
तरह - तरह
से समझाया
कभी फुसलाया
कभी बहलाया
बात नहीं बनी तो
कभी डांटा
कभी फटकारा
सौ - सौ उलहाने
दिये खुद को
सौ - सौ जतन
किये खुद पे
समझदारी की सीख
वक़्त की नजाकत दी
पर मन है
कि मानता ही नहीं...
~रश्मि
विष्णु और ब्रह्मा कौन पूजनीय एक समय की बात है क्षीरसागर में श्याम वर्ण क…
0 Comments
Do not post spam links