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प्रेम कविता
भूल ( poem)
भूल ( poem)
Rashmi
March 17, 2026
भूल (poem)
हमारी भूल थी
हमने कुछ ज्यादा ही
तमनाएँ पाल ली।
खुशफहमी हो चली थी
अपनी तकदीर पे
हमारी भूल थी।
कुछ पन्ने खुलते ही हैं
बंद होने के लिये
हम ही तैयार ना थे
ये हमारी भूल थी।
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