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भूल सकना (Poem)

भूल सकना (poem) 


भूल सकना मुमकिन होता
तो तुम्हें जरूर भुला देते। 

रोज आग में जलना 
किसे अच्छा लगता है। । 

कोई दवा कोई दुआ होती
तो जरूर आजमा लेते। 

कोई मन्दिर कोई मस्जिद होता 
सदका करके तुम्हें भुला पाते
तो तुम्हें जरूर भुला देते। । 

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