यादों से रिहाई
यादों से रिहाई हमें उनसे मोहब्बत इतनी है कि उनकी परछाइयों को भी निहारते है…
बस इतनी सी मिल्कियत अपनी ही जज़्बातों से खुद ही फ़रेब खा रही ... अपनी ही उम्मीदों की राख लपेटे जसद शमशान सा लग रहा... पलकों की भींगी को…
Read moreनफस की बात पहली बार अपने आप पे रोना आया.. ऐसे ना थे हम इस बात पे रोना आया... सही व गलत से परे मेरा इश्क़ फिर क्यों इस सहब पे रोना …
Read moreयाद आती है याद आती है बहोत आती है जब आती है तो जाती नहीं जाती नहीं तो मिलने का दिल करता है मिलने का कोई Option नहीं.... कोई …
Read moreमु्ददतों के बाद बड़ी मु्ददतों के बाद तुम्हें पाया है डर है कि तुम फिर चले ना जाओ... करोड़ो सीपियों के बीच तुम्हें ढुंढा है डर है कि तुम क…
Read moreकोई इंतजार करता चला जाता है तारीखें बदलती रहती है दिन गुजरता रहता है थमा - थमा सा वक़्त भी चला ही जाता है पर कोई बिछोह के उस लम्हें में …
Read moreजब तु याद आये जब तू याद आये इस कदर कि गीली लकड़ी सी सुलगूँ और अपने ही बेजार दिल को थामूँ जब तु याद आये इस कदर कि आसमां की चांदनी भी मा…
Read moreमन (कविता) मन को तरह - तरह से समझाया कभी फुसलाया कभी बहलाया बात नहीं बनी तो कभी डांटा कभी फटकारा सौ - सौ उलहाने दिये खुद को सौ - सौ जतन …
Read moreयादों से रिहाई हमें उनसे मोहब्बत इतनी है कि उनकी परछाइयों को भी निहारते है…