हम खामोश हैं
वह खामोश हैं
यही तो खास बात है
कह दूं गर तो आम बात है
कुछ उसकी ख्वाहिश
कुछ मेरी जरूरत
बयां क्यों करें
वो दूर है
मगर पास है
तसरीफ़ क्या करना
तस्कीन दिल है हमारा
यही तो मोहब्बत की
अनकही दास्तान है
कि........
हम रोज दस्तरख्वान बिछाते हैं
उम्मीद का दामन थामते हैं
इकराम हमारे इश्क की
दस्तावेज की जरुरत क्या है
इश्क सजदा है
इश्क खुदा है
क़ज़ा आये भी तो क्या
मोहब्बत में कुर्बान होना
मुकम्मल इश्क की इबादत है
ये खत तो बस मोहब्बत के नाम है
मोहब्बत के नाम है...
उर्दू शब्द - हिंदी में अर्थ
तसरीफ़ - वर्णन करना
तस्कीन - संतोष
दस्तरख्वान - चादर जिस पर खाने की तश्तरियाँ सजाते हैं
इकराम - मान
दस्तावेज - इकरारनामा
क़ज़ा - मौत
इबादत - पुजा
~रश्मि

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