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किताब कैसे व क्यों पढ़े

 किताब कैसे पढ़े? 
सवाल कितना आसान है 
जवाब आसान है क्या.... 


जो भी हो किताब थोड़ी-थोड़ी ही पढ़ा करें। 
मयखाने में रखी शराब थोड़ी-थोड़ी
पिया करें। 
प्रेम भी थोड़ी - थोड़ी ही किया करे
वरना.... 
खैर छोड़िये
किताब सुबह की पहली चाय व ब्लैक कॉफी के साथ पढ़े 
और दोपहर की नींद के साथ पढे़।
रात नींद नहीं आने तक पढ़े 
जैसे भी पढे़ पर पढ़े जरूर। 

मगर ज्यादा ना पढे़ वरना सपने में किताब की किरदार भरतनाट्यम करने लगेगें और आपकी नींद व मन सब खराब। 

अब सवाल है की किताब क्यों पढ़े?

परेशान हो तो किताब पढ़े 
दर्द में हो तो किताब पढ़े। 
इंतजार में हो तो किताब पढ़े, 
उदास हो तो किताब पढ़े, 
मन वैरागी हो तो किताब पढ़े, 
दिल घबराए तो किताब पढे़। 

कुछ न करने का हो तो किताब पढ़े।
करने को बहुत कुछ हो तो भी किताब पढ़े। 
मोबाइल से दूर जाना हो तो किताब पढ़े। 
खुद को जानना हो तो किताब पढ़े। 
सुख में दुख में कैसी भी परिस्थिति हो किताब जरूर पढ़ें। 

जीने की तलब ना हो
मरने की ख्वाहिश जगे तो किताब पढ़े 
थोड़ी सी पढ़े मगर पढ़े जरूर। 

ट्रेन में पढे़ व प्लेटफार्म पर पढे़, 
पहाड़ पर पढे़ या नदी व समंदर में पढे़ पर पढे़ जरूर ।

ना हो किताब
तो खाली पन्नों को पढें
चाहे पूर्णिमा की चांद में पढे़
चाहे अमावस्या के अंधेरे में पढे़ 
मगर पढ़े जरूर ।

जाना तो सबको है तो जाने से पहले खूब पढ़ कर जाए ।
उत्सव में पढे़ तो अवसान में पढे़ शमशान में पढे़ तो मृत्यु में पढे़ 
पर पढ़े जरूर। 
जब कुछ ना समझ आए तो भी किताब जरूर पढे....continued


Rashmi~

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