आज हम वो नहीं जो हम हैं
हमने अपनी रूह को
कोने मे दफना कर रख दिया
आज जो हम लिखना चाहते
लिख नहीं सकते
आज जो हम कहना चाहते
कह नहीं सकते
हमने देखना छोड़ दिया
हमने सोचना छोड़ दिया
आज हम वो नहीं, जो हम हैं
आज हम हैं गुलाम
समाज शासन और सत्ता के
शासक की तामिल का उल्लंघन करो
तो शासक नाराज हो जाता है
शासक की कमियों को गिनाओं
तो समाज नाराज हो जाता है
शासक की सत्ता चलाने के
उटपटाँग तरीकें की बात करों
तो न्यूज वाले नाराज हो जाते हैं
लगता है हम हम ना रहे
खेतों मे खड़े बिजुखा हो गये
~रश्मि
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