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केतु क्या है

केतु क्या है

केतु क्या है ? 

बचपन में जब 
यह सवाल उठे गर
मैं कौन हूं ? 
शरीर से अलग आत्मा की खोज हो... 
जब मन आपका ढूंढे
यह सवाल कि
इसी शरीर में 
में क्यूँ हुआ जन्म
किसी और में भी हो सकता था... 
तब समझना 
आप केतु वाले इंसान हैं। 

भीड़ में होकर भी अकेलापन लगे 
तब समझना तुम 
केतु वाले हो.... 
एकांत आनंदमय हो
तो समझना 
तुम्हारा केतु प्रबल है । 

केतु आरंभ है 
केतु अंत है 
लोगों के सच-झूठ 
छल-प्रपंच 
महसूस होने लगे... 
कुछ होने से पहले 
क्या होने वाला है 
पता चलने लगे 
सपने सच होने लगे
तो वह केतु की अच्छी निशानियां है । 

जब मोह से 
माया से विरक्ति हो 
मन वैरागी बन जाए 
तब समझना 
तुम्हारा केतु अच्छा जा रहा है। 

केतु की ऊर्जा मुक्ति प्रदान करती है 
जन्म और मृत्यु का चक्र समाप्त करती है
केतु किसी ग्रह के साथ 
युक्ति करें या दृष्टि करे
तो आपको आगे बढ़ाये 
यही तो धूमकेतु है।

सूर्य हमारी आत्मा का कारक 
यानी आत्मग्रह है, 
केतु आकाश का टूटा तारा 
जीवन-मृत्यु से निकाल 
आत्मा (सूर्य) से मुक्त करने वाला, 
केतु आत्मा के बंधन को तोड़ 
क्षीरसागर में विष्णु के पास पहुंचता है। 

यूति और दृष्टि की बात हो गर 

सूर्य + केतु 
प्रसिद्धि  और नींद का करता है त्याग, 
तभी तो दूसरे के लिए करता है काम
यही लोग 
तो बन जाते है नेता। 

शुक्र + केतु
नए जीव की उत्पत्ति में है रुकावट, 
नये सृजन में परेशानी।

चंद्रमा + केतु भावनात्मक परेशानी 
खाना और घर छोड़ जाना पड़ता है। 

मंगल + केतु 
अहंकार से युक्त 
होता है इंसान 
पर अपने स्वास्थ्य पर 
गर्व नहीं कर पाता। 

बुध + केतु
उच्च कर्म है इनका, 
जो उन लोगों से मिलकर बने हैं
जो पिछले जन्म में 
उच्चता के शिखर पर थे, 
और बुद्धि व्यापार को जागृत करने वाला। 

गुरु +केतु 
परम ज्ञान है। 
गुरु केतु को करना हो ठीक 
तो वस्तु - व्यक्ति - विषय 
जो जाना चाहता है 
उसे जाने दो 
विदा करो
सब अच्छा हो जाएगा 
लौट के झोली भर
तुम्हारे पास ही आयेगा
जब आपका गुरु-केतु 
सही काम करें 
हाथ आपके सदा सफ़ा होगी। 

शनि + केतु कालचक्र से मुक्त करें। 

अब और लिखने कि 
 इतनी ही बिस्यात मेरी, 
अब इतनी ही सफ़ा है मेरी.... 

Rashmi~

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