एक ख्याल आया
कभी तु था उसके
दिल का सरताज
आज बना है उसके
दीदार का मोहताज
युं गली गली
चक्कर काटकर
तो ना मिलेगा
मोहब्बत की बरसात
वो तो अपने सजन की हो गयी
छत पे दाना डालने से क्या होगा
देश तो परदेश हो गया
अब चिठ्ठी लिखने से क्या होगा
उफ! ये
गली वाला इश्क
हो जाये तो
शहर शहर मयखाना
ढूंढने से क्या होगा
जाम हो इश्क का
तो पैमाना का क्या हिसाब होगा
देवदास वाला इश्क करने से क्या होता है
आज की पारो प्रैक्टिकल ही मिलेगी
लिखाई पढ़ाई छोड़
कामकाज छोड़
बौराने (पगलाने) से क्या होगा...
जोरू किसी और की बन गयी
अब याद में
बाल सफेद करने से क्या होगा
उफ़! ये
गली वाला इश्क
यहां ना कोई हीर है
ना ही कोई लैला
यहां तो बस
पैसे वाला इश्क है
जांच परख कर
सोच समझकर
अब तो की जाती है मोहब्बत...
देखने में मन को
भले भला ना लगे
पर पॉकेट से मनी वाला जरूर हो
उम्र की भी कोई सीमा रेखा नहीं
उम्रदराज भी चलेगा
पर बेरोजगार ना चलेगा
हाय !
तु क्युं मजनुं बना फिर रहा
अब ना कोई लैला मिलेगी
आत्मनिर्भर का नारा है
अपने आपको तो निर्भर कर
कुछ काम कर
कुछ नाम कर
खुद से तो पहले इश्क कर
फिर तो इश्क इश्क ही है
उफ़! ये
गली वाला इश्क
अब ना चलेगा...
~रश्मि
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