यादों से रिहाई
यादों से रिहाई हमें उनसे मोहब्बत इतनी है कि उनकी परछाइयों को भी निहारते है…
यादों से रिहाई हमें उनसे मोहब्बत इतनी है कि उनकी परछाइयों को भी निहारते हैं बड़ी शिद्दत से यादें जब मारती है बड़ी इश्तिदाद से मौत की ख्या…
Read moreख्याल-ए-दिल (poem) दिल को बहलाने के लिये ख्याल बड़े अच्छे-अच्छे आते हैं हमें दिल डूब भी जाता है ख्यालों के डगर में बड़े ग…
Read moreमन (कविता) मन को तरह - तरह से समझाया कभी फुसलाया कभी बहलाया बात नहीं बनी तो कभी डांटा कभी फटकारा सौ - सौ उलहाने दिये खुद को सौ - सौ जतन …
Read more* ख्याल मिले जज्बात मिले तेरे होने से मेरा शहर मिले। क्या ढूंढ रही है जिंदगी ख्वाहिशों का अम्बार मिले।। * तुम्हारा मिलना गैरजरूरी है…
Read more1. कल रात खुदा से मुलाकात हो गई तुम्हारे दीदार की दुआ हो गई इतना भी क्यों खफा हो गई सारे जहां को खबर हो गई.... 2…
Read moreयादों से रिहाई हमें उनसे मोहब्बत इतनी है कि उनकी परछाइयों को भी निहारते है…