मु्ददतों के बाद (कविता)
मु्ददतों के बाद बड़ी मु्ददतों के बाद तुम्हें पाया है डर है कि तुम फिर चले …
मन (कविता) मन को तरह - तरह से समझाया कभी फुसलाया कभी बहलाया बात नहीं बनी तो कभी डांटा कभी फटकारा सौ - सौ उलहाने दिये खुद को सौ - सौ जतन …
Read more* ख्याल मिले जज्बात मिले तेरे होने से मेरा शहर मिले। क्या ढूंढ रही है जिंदगी ख्वाहिशों का अम्बार मिले।। * तुम्हारा मिलना गैरजरूरी है…
Read more1. कल रात खुदा से मुलाकात हो गई तुम्हारे दीदार की दुआ हो गई इतना भी क्यों खफा हो गई सारे जहां को खबर हो गई.... 2…
Read moreमु्ददतों के बाद बड़ी मु्ददतों के बाद तुम्हें पाया है डर है कि तुम फिर चले …