तुम्हारा स्वप्न (छोटी कविता)
तुम्हारा शहर भी पहाड़ हो गया
सारी फिजा सफेद हो गयी
रंग जैसे फना हो गया
तुम आए,
आँखें बोलती रही
लब चुप से हो गए
मुस्कुराकर गालों पे इक चुंबन हो गया
बस इतनी सी कहानी थी
सारा शहर जाग उठा.....
यादों से रिहाई हमें उनसे मोहब्बत इतनी है कि उनकी परछाइयों को भी निहारते है…
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