उदास इश्क (kavita)
मेरे पहलू से रोज गुजरती है
नम आंखों व मुस्कुराते लबों से
पूछती है -
इश्क की वजह क्या है ?
कैसे कहूं उनसे
इश्क करने की वजह भी नहीं है
इश्क ना करने की वजह भी नहीं है
बेवजह इश्क का यह दरिया है
या तो इश्क में डूबना है
या तो इश्क में तैरना है
मुकम्मल तो कुछ भी नहीं होता
ना प्यास कम होती है
ना इंतजार कम होता है
ये इश्क का सफर है
मंजिल मयस्सर नहीं होता
सफर जारी है
एक उदास इश्क
रोज मेरे पहलू से गुजरती है.....
रश्मि ~
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