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उदास इश्क 5

उदास इश्क़ 5



कभी कभी 
उदास इश्क़ कि
हर शाम उदास होती है
कभी लफ़्ज उदास है तो 
कभी मौसम उदास होता है
घर का हर साजों सामान 
अपनी उदासी की दास्तां बयां करता है 
चिड़ियों की बोली
उदासी की गीत गाती है
झुंगुरों की तेज आवाज
एक अजीब सी बेचैनी... 
और
ना जाने कौन सा 
हुनर है मुझमें
घंटों बीत जाते हैं
खामोशी में
ना समय का पता
ना खुद का पता... 
किसी ने पुछा -
कौन सी दुनियाँ में हो
मैंने खुद से कहा
इश्क़ में..... 


Rashmi ~

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