पारिजात की तरह
टूटकर बिखर जाने में है
चलो एक बार फिर
भूल जाते हैं एकदूसरे को
ना मजबूरी का तकाजा हो
ना इंतजार की कहानी रहे फिजा में
मिलना हुआ नसीब में कभी
राह चलते-चलते पल -दो- पल...
फिर अपनी राहें
फिर अपनी मंजिल....
यादों में थोड़ा
तुम याद रहना - थोड़ा हम
इत्ती सी कहानी रहे हमारी
पारिजात की तरह...
चलो एक बार फिर
भूल जाते हैं एकदूसरे को....
Rashmi~
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