जाने कितने तुम्हारे अक्स हैं
जाने कितने तुम्हारे किरदार हैँ
वक्त -वक्त पे
बदलते रहते हैं
तुम्हें ये भी बनना है
वो भी बनना है
सबकी नजरों में
मगर अच्छा बनना है
मैं अब थक गई...
रिश्ते में ईमानदारी
ढूंढ़ते - ढूंढ़ते
आत्मसम्मान से बढ़कर
नहीं जीवन में कुछ और साथी
खुश रहो रिश्तों की भीड़ में तुम
खोकर मुझे...
झूठ की अग्नि में
सच मर गया मेरा 'महावीर जी '
सच ही तो कहा किसी ने
अकेले आये हैं अकेले जाना है......
~रश्मि
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