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नाशुक्रगुजार ( kavita )

नाशुक्रगुजार  (Hindi kavita)




नाशुक्रगुजार लोगों की कमी नहीं
इस जहाँ में...
जहाँ भी देखो नाशुक्री मौजूद है
कितना भी मिले 
कितना भी करो
'बस' कहते नहीं कभी..
शुक्रगुजार होना तो इनकी फितरत में नहीं
लालसा रूपी मुँह का ढक्कन बंद होता नहीं कभी
वोट हो या नोट
पाने के बाद
याद रहता नहीं कभी 
तभी तो नाशुक्री 
जिन्दा शरीर में
मुर्दों की आत्मा है....
सच ही तो कहा है किसी ने
परवरिश बड़ी महत्वपूर्ण बात है...
बेईमानों की टोली में
ईमानदारी तो हराम है
तभी तो !
जिन्दा देश में 
मुर्दा शासक का बड़ा नाम है...
हम तो शुक्रगुजार हैं
बस इत्ती बात पर
आज भी कुछ 'इंसान' 
'इंसान' की बात यह है
पुतलों की नहीं 
आपके जैसे नहीं
जिन्दा हैं, जीवंत हैं...
शुक्रगुजार है 

~रश्मि 

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