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ऐ तिमिर (हिंदी कविता)

ऐ तिमिर (हिंदी कविता)



 ऐ  तिमिर बस इतना तो बता
 यह गुलाबी सांझ क्यों
 धीरे-धीरे रात बन जाती है
 माना कि शनै-शनै
 मौसम बदल जाता है
 आहिस्ता-आहिस्ता
 दुनिया बदल जाती है
 रोते-हंसते
 जिंदगी बीत जाती है
 मगर फिर भी
 क्यों.....
 जिंदगी एक बेसबब भटकाव
 हो जाती है
 जो उलझ-उलझ कर
 सजा बन जाती है
 ऐ तिमिर बस इतना तो बता
 यह गुलाबी सांझ क्यों
 धीरे-धीरे रात बन जाती है 


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