दर्द रे
तेरे कितने रूप अनेक
कभी तू असीम वेदना देता है
कभी तो दुख में थपकीयाँ देता है
कभी कठिन हालातों में
हाथ थाम
संबल बन जाता है
हद से गुजर जाये तु
तो दोस्त बन जाता है
फिर भी यार...
तू बहुत रुलाता है
अपना होकर भी
तुझे कोई अपनाता नहीं
हर कदम पे
परोक्ष-अपरोक्ष होकर भी
तेरा साथ कोई चाहता नहीं
ऐसे में...
कैसे दुनिया को यकीन दिलाऊँ
तू ही मेरा सच्चा साथी है
मेरे अंदर की रीता को
तू ही रोज दफनाता है
दर्द रे
तेरे कितने रूप अनेक
~रश्मि
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