मोहब्बत को दिल पर लिखना
इतना आसान नहीं होता
बादल का टूटकर बरसना
कुछ कदम चलकर
या कुछ कदम ठहरकर
रोज नया अफसाना लिखना
इतना आसान नहीं होता
तुमको भुला दूं
या तुम्हें याद करूं
इतना आसान नहीं होता
कुछ तुमने भी याद किया होगा
कुछ हमने भी फरियाद किया होगा
फिर भी हमारा मिलना
इतना आसान नहीं होता
मुकद्दर को जो ना हो मंजूर
वो किस्सा भी कैसे बयां होता
रातों को उठ उठ कर
वो तारों को गिन-गिनकर
लफ्जों को सिलकर
उन्हें याद करना
इतना आसान नहीं होता
कुछ खत मोहब्बत को लिखना
लिखकर उसे मिटाना
और उस ख्वाब को पालना
उस तलक पहुँच जाये
अनकहे अहसास जरा सा
इतना आसन नहीं होता
सच में...
मोहब्बतें को दिल पर लिखना
भी इतना आसान नहीं होता....
~रश्मि
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