उसे सर पे क्युं बैठाना
गधे को गधा ही रहने दो
घोड़ा मत बनाओ
जीवन हमारा खुद का है
खुद को महत्व दो
दुसरी का सोच कर
अपना क्या बिगाड़ना
जिन्दगी उतनी भी लम्बी नहीं
जितना हमें लगता है
हँसने का वक्त कम
कहीं पड़ ना जाये
रोने और रुलाने से
फुरसत मिले
तो सोचने का वक्त
कहीं चला ना जाये
दूसरे के घर के मसले में घुसने से अच्छा
अपने मसले सुलझा
लेने का वक्त निकाल लें जरा
जो महत्वपूर्ण नहीं जीवन में
उसके पीछे दौड़ क्या लगाना
दूसरे घाट का पंडित बनने से अच्छा
अपने घर को मंदिर बना लें जरा
किसी को दिशा निर्देश
सिखाने से कुछ नहीं होता
खुद के दिल का मैल
गंगा में बहा कर तो आ
जहाँ पूछ नहीं
वहां पूँछ बनने से क्या होता है
जो महत्वपूर्ण नहीं जीवन में
उधर जाने से कुछ नहीं होता
~रश्मि
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