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इश्क का बाजार ( कविता )


बेवफाई का दर्द
अब दर्द ना रहा
बस गया सीने में
घुल गया साँसो के संग
अब रोज एक धुन
चलती है सीने में
थिरकता है दिल
इश्क के बाजार में
रोज बिकते हैं दिल
जब चाहे खरीद लो
हर राह -हर मोड़ पे
खरीदार भी हैं
बिकने वाले भी हैं
वफा नाम की यहाँ
कोई दौलत नहीं हैं
सांस छूटने से पहले
साथ ना छूटे
अब यहाँ कोई
ऐसा रिश्ता नहीं
रोज बिकते हैं दिल
इश्क के बाजार में......

~रश्मि 



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