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उसकी निस्बत में (हिन्दी कविता )


ऐ आसमां
आज तू भी
तन्हा है
मैं भी तन्हा हूं
मौका है
जरुरत भी है
तु भी बरस
मैं भी बरसुँ
फिर मिलकर
टूटे रिश्ते का
उत्सव मनायें
तूने बड़ी देर तक
चमक - चमक कर
खुद को जलाया है
मैंने भी बड़ी देर से
पलक मुंद कर
आँसू जलाये हैं
आज तु इतना
बरस की
मैं बह जाऊं
उसकी निस्बत में
उसकी निस्बत में

~रश्मि 

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