रहा भी नहीं जाता
बात चलेगी दूर तक
कहा भी नहीं जाता
एक मयखाना जींदगी
पीया भी नहीं जाता
मगर जाम हाथ से
छोड़ा भी नहीं जाता
मौका परस्त है जींदगी
ढ़का भी नहीं जाता
मगर मौत का ये पैमाना
उघाड़ा भी नहीं जाता
सबकी हर बात भी छोड़ी
सबकी तलबगार भी छोड़ी
मगर रहगुजर हर बात की
याद छोड़ी भी नहीं जाती
दुनियां की हर बात से तौबा
मगर क्या करूं ऐ जिन्दगी
तेरी बेमुरब्बत इल्जाम से
पीछा छुड़ाया भी ना जाता
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