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आजकल ऐसा होता है (कविता)

   आजकल ऐसा होता है  (कविता)

1. हर सफर सुहाना हो यह जरूरी नहीं होता
जींदगी में हर किसी का ठिकाना नहीं होता ।
राह चले हर हमराही हमसफर नहीं होता
जींदगी का हर किस्सा फ़साना नहीं होता ।।

2. हर वक्त हर कोई गलत नहीं होता
हर सही बात हर वक्त सही भी नहीं होती ।
सिक्के का दो ही नहीं तीसरा पहलू भी होता है 
सब समझ ही जाए तो फिर बात क्या होता ।।

3. आसमां में पत्थर उछालने से क्या होता
किस्मत में जो होता है वही होता है ।
साथ अपनों का अगर नहीं होता
तो हर कोई तीर भाले ले खड़ा ही होता है ।।

4. बस पढ़ने लिखने से क्या होता है
कुटनीति ना आए तो सब बेकार होता है ।
पीठ पर छुरा भोंकने वाले कम नहीं होते
हाथों की उंगलियां एक जैसी नहीं होती ।।

5. जो करे सब बेकार होता है
जो कुछ ना करें उसी का नाम  होता है ।
यही जिंदगी की नई परिभाषा होती है
अच्छा होना ही बुरा होता है ।।
~रश्मि

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