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आदिमानव रूपी इंसान (कविता )


कुछ आदि मानव रूपी
लोग बहुत झुंझलाते हैं
दूसरे को नीचा दिखाने 
के लिए उटपटांग बातें करते हैं
बे-सिर-पैर की बातें कही जाती है
आखिर क्यों...... 
क्योंकि कहने वाला इंसान 
दुसरे के नसीब से
हारा हुआ होता है
ना किसी का साथ होता है
ना ही कोई परिवार
रिश्तों की आभासी दुनियां में
खोया हुआ
अकेला छटपटा हुआ
अपने आप पे खिसियाता हुआ
दूसरे पे टीका-टिप्पणी करता हुआ
खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे
को सार्थक करता है
अपने बलबूते तो कुछ होता नहीं
दूसरे के घरों में 
आशियाना बनाता हुआ
दुसरे की रोटी झपटा मार खाता हुआ
आस-पास ऐसे आदिमानव
नजर आ ही जाते हैं
समझ सबको आता है
पर हमें आदिमानव बनना आता नहीं
बड़े बुजुर्ग कहे जाते हैं -
जंगली सुअरों के मुंह लगा नहीं करते
अपना धर्म बिगाड़ा नहीं करते
इसलिए.....
कुछ आदिमानव रूपी
लोग बहुत झुंझलाते हैं....
~रश्मि

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