Ticker

6/recent/ticker-posts

आजकल मैं लो चल रही हूं (कविता )

सोचती हूँ 
आज कोई कहानी लिखूंगी 
कोई किस्सा कोई रवानगी लिखूंगी
पर ना मन चलता है 
ना कलम चलती है 
कह दूं कि मैं थोड़ी आजकल लो चल रही हूं 
हमें भी थोड़ी डोज की जरूरत पड़ती है 
थोड़ा सा दुलार
थोड़े से प्यार की जरूरत पड़ती है 
बच्ची नहीं तो क्या हुआ 
हमें भी थोड़े से इसरार की जरूरत पड़ती है 
सिर्फ खाना बनाने की मशीन नहीं हम
सिर्फ घर को संवारने का जिम्मा नहीं हम
हम भी तो इंसान है 
हमें भी थोड़ी डोज की जरूरत पड़ती है 
काश कौई भूला बिसरा भी
मैसेज कर दे और कहे तुम ठीक हो ना
पर ऐसा होता कहाँ है 
सब अपने अपने में व्यस्त हैं 
सबका अपना अपना किस्सा है 
कहते हैं किसी को दिल से याद करो तो
उसतक बात पहुंच जाती है 
यहाँ भी सब उल्टा पुल्टा होता है 
याद करो किसी को 
याद कोई ओर कर लेता है 
मोबाइल की रिंगटोन बजती है 
उधर से  आवाज आती है और
कौई अपना दुखड़ा सुना जाता है
यह सुन मैं थोड़ी ओर लो हो जाती हुं
हर तरफ शोर है हर तरफ आपाधापी है 
पर मेरा हृदय कुछ ज्यादा ही शांत है 
पर यह शांति मन की है 
दिमाग में तो चार सौ चालीस करेंट चल रहा है 
आजकल मैं थोड़ी लो चल रही हूं 
ऐसे में बहुत याद आते हैं पापा
जब होते थे उदास हम
तो पापा सर पर हाथ फेर देते थे
कहते थे - सब ठीक है 
और जादू हो जाता था 
सारी बातें हवा हो जाती थी
सोचती हूँ पिता के सिवा 
और किसी में ये जादु क्यों नहीं होता
आजकल मैं थोड़ी लो चल रही हूं ....
~रश्मि 





Post a Comment

0 Comments