1. जब तन्हाई के बेल
जब तन्हाई के बेल
जकड़ने लगे
तब यादों को
दोस्त बना ले हम
गुजरे हुऐ पलों का
हाथ थाम
थोड़ा घुम-फिर ले हम
ख्यालों की पतंग पकड़
आसमां में उड़ जाये हम
ना कुछ ओर कर सके
तो आंसुओं में तैरकर
दर्द का समंदर पी जाये हम
जब तन्हाई के बेल
जकड़ने लगे।
8-11-09
2.जींदगी एक वेटिंग रूम
जींदगी एक वेटिंग रूम है
सपनों की तरह यहाँ
अपने भी आते हैं
कुछ देर ठहरते हैं
फिर चले जाते हैं
कुछ हासिल होने का गुमांन
कुछ खोने की कसक
यहीं से होकर गुजरती है।
17-2-11
3.तन्हाई का मंजर
तन्हाई का मंजर
हमसे ना सहा जायेगा
अपनों की बेरूखी
हमसे ना सही जायेगी
कुछ तो दोष
हमारा भी होगा
कुछ तो दोष
किस्मत का भी होगा
कुछ तुम दुर हुये
कुछ हम दुर हूये
पर हमसे ये फसाना
सहा ना जायेगा ।
23-6-20
4. आखिरी साँस तक
तेरा ही ख्याल रहेगा
तु कहे ना कहे
तेरा ही नाम रहेगा
तेरा ही जज्बात
तेरा ही पैगाम रहेगा
तु रहे ना रहे
तेरा ही आस रहेगा
ये खामोशी की जुबां है
चांद-तारों की कहानी नहीं
दिन के उजियारे में खो जाये
आखिरी सांस तक
तेरा ही अक्स रहेगा...
6-7-20
5. कुछ कही - कुछ अनकही
कहनी होती है
कई बात
जुबां पे आके
रुक जाती है
कुछ कही कुछ अनकही बात
पुछनी थी तुमसे
लहरें क्यों
किनारे आकर
फिर लोट जाती है
धरा क्यूँ आकाश से
मिलकर भी नहीं मिल पाती
संजोग है
या भाग्य का लेखा
मिलकर भी
क्यूँ मुठ्ठी में रेत की तरह
सब फिसल जाते हैं
सारे जज्बात...
7-7-20
~रश्मि
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