जींदगी से युँ अकेला कर दिया
अपना समझा था जिसे
हमराही माना था जिसे
बीच राह में अधुरा कर दिया
अफसाने तो कई बुने तेरे संग
युँ संग चलके फसाना बना दिया
जींदगी से युँ किनारा कर दिया
दिल को बना लिया पत्थर
युँ ठोकर लगा के पाषाण बना दिया
तुमने युँ किनारा कर दिया।
~रश्मि
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