तो वो खफा हो जाते हैं
वो दगा कर देते हैं
तो हम फना हो जाते हैं
खामोशी-इल्जामों और बेरूखी का
सिलसिला चलता रहता है
ना हम कुछ कहते हैं
ना वो कुछ सुनते हैं
जींदगी बस गुजरती जाती है
ना अपना पता रहा
ना उसकी खबर रही
बस मौत का समंदर है ये
डुबकी चलती रहती है
ना दिवानों का जिक्र है
ना इश्क का सरूर है
बस एक फरियाद है
वादों का.......
वादा टुट कर गुजरती रहती है
हम ख्याल में भी वो आये कभी
उम्मीद जलती रहती है
हम अगर कुछ कहते हैं
तो वो खफा है जाते हैं।
~रश्मि
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