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हम अगर कुछ कहते हैं (कविता)

हम अगर कुछ कहते हैं
तो तुम नाराज हो जाते हो
हम कुछ ना कहे 
तो तुम बेसब्र हो जाते हो
ये कैसा प्रेम का सुरूर है
ऐसे तुम क्यों हो जाते हो
कैसे कहुँँ तुमसे युँ ना किया करो
लबों की बंदिशें हैं हजार
तुम खामोशी को समझा करो
कौई कहानी - कौई किस्सा
ना तुम बयाँ करो
ना मैं बयाँ करूँ
ये कैसा नियम है
ये कैसा रिश्ता है
दिलो के बीच 
इतनी ऊँची दीवार
ख्याल है या हकीकत
इतना भी युँ  ना बना करो
कि तुम ही रहो मैं ना रहुँ
हम अगर कुछ कहते हैं
तुम नाराज हो जाते हो।
~रश्मि


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