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12-4-20

अब जाकर फ़ुरसत मिली है पर इसका मतलब ये मत समझये की काम ख़त्म हो गया है।
खैर जाने दीजिए....
सिर्फ नाम लिख देने से मेरा परिचय नही होता सच कह रही हूं ना....
मेरी पसंद नापसंद जानना ज़रूरी भी तो है ना।
मुझे किताबें पढ़ना पसंद है, किताबों में मैने प्रेमचंद, फणीश्वरनाथ रेणु की कहानियों औऱ उपन्यास पढ़ा है । अमृता प्रीतम, तस्लीमा नसरीन
आदि साहित्यकारों की रचना भी पढ़ी हूँ ।
खाना बनाना पसंद नहीं था कभी पर अब बच्चों औऱ पति के लिए ये भी मेरी पसंद में शामिल है।
 
परिचय तो चलता रहेगा क्योंकि अब सफर हर रोज का है ।
 अर्ज किया है - उड़ती रहूँ मैं तितलियों की तरह
                     पँख ना तोड़ देना पैरों तले ।
                     सफर हमारा यूँ बना रहे
                    समुन्दर और साहिल की तरह ।।
                  ~रश्मि

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