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खिड़की से चांद (poem)

खिड़की से चांद  (poem) 



जब तक मुस्कुराता है

खिड़की से चांद

हमें नींद नहीं आती

भले हो 

रात के दूसरे पहर

हाथों में हो 

चाय के प्याले

गोद में 

रखी हो किताबें

और

कानों में गूंजता हो

कोई सुरीला संगीत

जब तक मुस्कुराता है

खिड़की से चांद

हमें नींद नहीं आती... 

Rashmi ~




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