थोड़ा ज्यादा हो या कम
गम हो या खुशी
साथ मगर हो
तेरा ओ हमसफर
आ आज खुद से
वादा कर लें...
कैसी भी हो डगर
कैसी भी हो मंजिल
गर तेरा साथ हो
तो राह आसान हो जाए
फिर प्रलय भी क्या करें
जब हाथों का गठबंधन हो जाये....
दुनियां रहे ना रहे
पर सीने में धड़कती रहे
एक दुसरे की साँसे
लफ्ज़ भी खामोश हो जाये
मगर पथराई आंखों से
गुफ्तगू चलती रहे.....
दो गज जमीन
भले मयस्सर
ना हो जिस्म को
मगर रुह
हर जगह मौजूद रहे
हवा में खुशबु बनके....
बात छोटी सी है
मगर दुनियां तेरे बिन
रहगुजर नहीं....
थोड़ा ज्यादा हो या कम
साथ मगर हो
तेरा ओ हमसफर...
~रश्मि
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