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अजीब इत्तेफाक (कविता )


अजीब इत्तेफाक था
एक पल खुशियों से
सारोबार था
दूसरे पल दर्द की बरसात थी
एक पल जींदगी का
हसीं पल कदमों में था
दूसरे पल जींदगी की
स्याह शाम सामने थी
अजीब इत्तेफाक था
पहली बार बारिश की बूंदों से,
इतना प्यार हो आया
दूसरे ही पल,
बारिश की वही बुँदे
गम का पैगाम लिख गयी
पहली बार जिसे शिद्दत से
जिसे महसुस किया
दूसरे ही पल
वही साथ छोड़ चला
एक पल में अपना कोई
अजनबी बना गया
आहिस्ता से मगर
अचानक.......
जींदगी ले गया
अजीब इत्तेफाक था

~रश्मि 


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