जीवन में कई बार आते हैं
कई बार जन्म लेते हैं
कई बार खरपतवार की तरह उग भी आते हैं
फिर उतनी ही बार मर भी जाते हैं
क्यूँकि हम अपने सपने को
बस सपना ही समझ लेते हैं
सपने को हकीकत की जमीं पे उतरने ही नहीं देते
पकड़ते नहीं उसे कसकर
उसे सीने से गले लगाते नहीं
सपने में खोते नहीं
सपने को खो देते हैं
इसलिए सपने तो बहुत पालते हैं
पर उसे ठहरने नहीं देते
जाने देते हैं- मरने देते हैं
लक्ष्य से भटकते हैं
खुद को खोते हैं
हार मान कर
जो है सो है
आत्मसात कर
खुश होने का दिखावा करते हैं
बस दिखावा करते हैं
जीवन में असफल होते हैं
क्यूँकि सपने को आने तो देते हैं
पर रुकने नहीं देते...
~रश्मि
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